Barsaat Ka Mausam Essay Definition

[English]

बरसात का मौसम प्रेमियों का माना जाता है. गरमी का मौसम धरती को प्यासा छोड़ देता है मई के महीने में धरती बरसात के लिए तरसता हुआ कहा जाता है. प्रेमी, प्रेमिकाओं की स्थिती भी ऐसी ही होती है. उनके मिलन से पहले उनकी मनःस्थिति भी धरती की तरह प्यासी होती है जो अपने प्रेमी की राह में तरसते है. बारिश का मौसम बॉलीवूड का सबसे पसंदीदा मैसम है. बॉलिवूड में बढिया से बढिया गाने वर्षा ऋतु संबंधी है.

जब हम वर्षा और बॉलीवूड के बारे में सोचते हैं तो सबसे पहले मन में आता है वह सदा बहार गीत: प्यार हुआ इकरार हुआ, फिल्म श्री ४२० से. गाने के बोल और राज कपूर और नरगिस की जोड़ी एक छाते के नीचे बहुत मोहक लगते है. यहाँ से शुरू हुआ बरसात और बॉलीवूड का फसाना. बॉलीवूड के ही कारण अब हम बरसात के मौसम को मुहोब्बत के साथ जोड़ देते हैं.

हिंदुस्तानी संस्कृति में भी बरसात खुशी का मौसम है. ऐसे बहुत सारे लोक गीत है जो वर्षा ऋतु का वर्णन करते हैं. बहुत सारे त्योहार है जो बरासत का आगमन करते है जैसे कि, लोहरी, पोंगल, श्रावण. भारतीय चेतना में बरसात का मौसम खुशियों का मौसम माना जाता है.

जबकि सारी दुनिया में बरसात को मुसीबत मानी जाती है, हम हर साल इस ऋतु का बेसबरी से इंतिज़ार करते हैं. इसलिए अंग्रेज़ी मुहावरे जैसे कि ´saving for a rainy day´ हिंदी में कोई मायने नहीं रखते. अंग्रेज़ी में ‘rainy day’ का मतलब बुरा वक्त है, इस लिए ´saving for a rainy day´ का मतलब बुरे वक्त के लिए बचाए रखना. लेकिन हिंदी में बरसात खुशियों का मौसम है, इस लिए हम बुरे वक्त के लिए बचाए रखना हमारे लिए कोई मतलब नहीं रखता.

इसी तरह अंग्रेज़ी में dark clouds and cold winds किसी आपत्ति के लक्षण बता ते है, इसी के हिंदी उल्था में एक गाना प्रसिद्ध है: ठंडी हवा काली घटा आ ही गई झूम के/प्यार लिए डोले हसीन नाचे जिया घूम के.

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वर्षा ऋतु


ग्रीष्म ऋतु के पश्चात् 'वर्षा ऋतु' आती है। जुलाई और अगस्त के मास में वर्षा का जोर रहता है।

वर्षा ऋतु में आकाश पर काली घटायें हर समय छाई रहती हैं। नदी, नाले और तालाब सब पानी से भर जाते हैं। ऐसा प्रतीत होता है, मानो सूखी भूमि के भाग्य उदय हुए हों। भूमि हरे वस्त्र पहन लेती है।

इस मौसम में जंगल में मंगल हो जाता है। पक्षी प्रसन्न हो आकाश पर मंडराते हैं। कोकिला राग अलापती है। मेंढक टर्राते हैं। साँप, बिच्छु, कीड़े-मकोड़े भी बड़ी संख्या में बाहर निकल आते हैं। मक्खियाँ डंक मारती हैं। मच्छर सताते हैं। मलेरिया ज्वर एवं अन्य अनेक बीमारियाँ फ़ैल जाती हैं। 

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